

लीवर, किडनी दानकर सेंवाराम आज से अपनी अनन्त यात्रा पर”
”जोधपुर के झालामण्ड़ निवासी सेंवाराम प्रजापति ढ़िलवाड़ी के साथ गत 29 जुलाई को हुआ था सड़क हादसा”
”एम्स, जोधपुर में परिजनों को सौंपा गौरवशाली अंगदाता प्रमाण-पत्र”
”एम्बुलैंस को फुलमालाओं से सजाकर शव को ससम्मान सेंवाराम अमर रहे-सेंवाराम अमरे रहे के नारों के साथ किया एम्स से रवाना”
”सेंवाराम का वादा अधूरा रहा बेटे को एम्स में दिखाने का कह निकला था, लोटा नही”

जोधपुर। दिनांक 03 अगस्त 2025 (कार्यालय संवाददाता) जोधपुर जिले के ग्राम पंचायत झालामण्ड़ के कृष्ण मंन्दिर बगेची के महादेव कॉलोनी ढ़िलवाडीयो की ढ़ाणी निवासी सेंवाराम प्रजापति प्राईवेट स्कूल संचालक हैं जिनके अंगदान से जीवन और मृत्यु के बीच सर्घष कर रहे लोगों में नवजीवन की खुशींया भर दी हैं। सेंवाराम के परिवार में उनके माता-पिता, पत्नि और पुत्र-पुत्री, परिवाजनों के एक फैसले से चार लोगों को नया जीवन मिल रहा हैं जो कि बेहद ही अनुकरणीय हैं।
कुम्हार प्रजापति समाज के पुखराज बनावड़िया ने जानकारी देते हुए बताया कि झालामण्ड़ क्षैत्र के किसान परिवार से ताल्लुख रखने वाले उनके माता-पिता की इस पहल पर सड़क दुर्घटना में ब्रैन डेड हुए सेंवाराम प्रजापति (ढ़िलवाड़ी) के अंगों को डोनेट करने की सहमति के बाद रविवार अखिल भारतीय आर्युविज्ञान संस्थान (एम्स) जोधपुर में उनका सफल अंगदान हुआ सबसे पहले लीवर और सबसे बाद में किडनीया निकाली गई। लीवर और किडनी को जोधपुर एम्स के द्वारा जरूरतमंद रोगियों को ट्रांसप्लांट किये गयें और फैफड़े खराब हो जाने के कारण नही निकाला गया। किडनी, लीवर का दान कर श्री प्रजापति पब्लिक स्कूल, बिचलापुरा झालामण्ड़ जोधपुर के संस्थापक एवं व्यवस्थापक सेंवाराम प्रजापति ने जरूरतमंद लोंगों को नया जीवन देते हुए आज से अपनी अनन्त यात्रा पर रवाना हुए।
शनिवार, दिनांक 29 जुलाई 2025 को दोपहर के लगभग 2.00 से 2.30 बजे के आसपास अपने पुत्र स्वरूप प्रजापत को मामा की दुकान पर छोडने के के बाद नजदीकी मेडिकल की दुकान से दवाई लेने के लिए निकला तभी झालामण्ड़ चौराहा से मोती मार्केट मैन गुड़ा रोड़ के बीच स्थित गंजानन्द मोबाईल के सामने कट से यू टर्न लेते समय अत्यन्त तेज गति एवं लापरवाही से आ रहे एक मोटर साईकल सवार ने सेंवाराम को टक्कर मार मार दी जिससे प्राईवेट स्कूल संचालक सेंवाराम के सिर के बल रोड़ पर नीचे गिर जाने से अत्यन्त गंभीर घायल हो गये जिनको झुमरलाल ऐणिया, लादूराम सिनावड़िया ने अपनी कार में लेकर जोधपुर एम्स ट्रोमा सेन्टर में इलाज के लिए भर्ती करवाया जहां पर उनका उपचार चला लेकिन 02 अगस्त 2025 को जोधपुर एम्स के डॉक्टरों ने उनको ब्रेन डेड घोषित कर दिया था।
अंगदाता सेंवाराम प्रजापति-जो कि पेशे से एक प्राईवेट शिक्षक के रूम में कार्यरत रहे हैं एवं झालामण्ड़ क्षैत्र में श्री प्रजापति पब्लिक उच्च प्राथमिक विद्यालय, बिचलापुरा झालामण्ड़ जोधपुर के संस्थापक एवं संचालक हैं। जरूरतमंद लोंगो के परिवार में हमेशा सुरज की तरह चमकेगा सेंवाराम ढ़िलवाड़ी। मानवता के लिए इस तरह के श्रैष्ठ कदम के लिए परिवार की अनुकरणीय पहल को सभी जगह पर सराहा जा राहा हैं। सेंवाराम प्रजापत भले ही आज जिंदा नही हो लेकिन वह चार लोंगों के जीवन को आगे बढ़ायेंगा और उनके परिवार में खुशियों का माध्यम बनकर महकेगा सेंवाराम।


सेंवाराम अंगदान करके मानवता की श्रेष्ठता साबित की हैं कि मानव ही मानव के काम आता हैं और किसी को खुशी और नया जीवन मिलता हैं तो उससे बढ़कर दुनिया में कोई और दान हो नही सकता हैं आज ग्राम पंचायत झालामण्ड़, जोधपुर के कुम्हार प्रजापति समाज के किसान परिवार में जन्में सेंवाराम के परिजनों में श्रीमती पाकुदेवी-श्री शंकरलाल ढ़िलवाड़ी (माता-पिता) सहित श्रीमती धर्मी देवी (पत्नि) एवं एक स्वरूप-चन्द्रीका (पुत्र-पुत्री) सहित सत्यनारायण ढ़िलवाड़ी, सन्ताराम प्रजापत, सन्तोष कुमार, मनोज कुमार, सुरज रत्नलाल, बद्रीलाल, जेठाराम, घेवरराम, अणदाराम, पुनाराम, पप्पुराम, श्रवणकुमार, भगवानराम, दिनेश संदीप, लखपत, रमेश एवं आशोक कुमार, सुरेश कुमार सम्पूर्ण ढ़िलवाड़ी परिवार सहित झुमरलाल ऐणिया, लादूराम, एडवोकेट विनोद कुमार सिनावड़िया, जुगराज प्रजापत, लालाराम प्रजापत, इत्यादि की प्रेरणा एवं परिवार की जाकरूकता के साथ-साथ सहमति प्रदान कर दिखाया और इनके परिवार को जोधपुर एम्स में पुर्व में हो रखे अंगदान के बारे में जानकारी एवं उनका महत्व पता था। उल्लेखनीय हैं कि गत 29 जुलाई 2025 को झालामण्ड़ चौराहा से घर जाते समय सेंवाराम प्रजापति सड़क हादसे में गंभीरर घायल हो गये थे जो कि जोधपुर एम्स में भर्ती था।
”शव पर पुष्प चक्र अर्पित” जोधपुर एम्स प्रशासन ने दिया ”गार्ड ऑफ आनर”
”एम्बुलैंस भी सजाई एवं जगह-विभिन्न सामाजिक संगठनों ने पुष्प वर्षा से किया स्वागत”
एम्स प्रशासन जोधपुर ने ससम्मान प्रशंसा-पत्र के साथ-साथ सेंवाराम प्रजापति के शव को पुलिस एवं अन्य प्रशासनिक कार्यवाही के पश्चात उनके परिवारजनों को दोपहर पश्चात साैंप दिया। एम्स के अधीक्षक एवं उपाधीक्षक सहित अन्य डॉक्टरों एवं विभिन्न समाजिक संगठनो में हिन्दू सेंवा मण्डल जोधपुर, विश्व का प्रथम श्री श्रीयादे माता पावन धाम झालामण्ड जोधपुर ़, श्री पुरबीया प्रजापति कुम्हार छात्रावास संस्थान, झालामण्ड़ एवं सहित श्री प्रजापति कुम्हार न्याति समाज संस्थान के विभिन्न प्रतिनिधियो नें शव पर पुष्पचक्र चढ़ायें। सेंवाराम ढ़िलवाड़ी के शव को उनके पैतक निवास स्थान तक ससम्मान एस्कोर्ट मय एम्बुलैंस के साथ रवाना किया गया। एम्बुलैंस को भी फुल-मालाओं से सजाया गया। उल्लेखनीय हैं कि इससें पहले भी जोधपुर एम्स में परिवार जनों की सहमति एवं जाकरूकता एवं प्रेरक पुखराज प्रजापति, मानाराम सुथार,भंवरलाल गौदारा के द्वारा विक्रम सुथार पुत्र रमेश आचू एवं अनिता चौधरी पत्नि ठाकरराम का अंगदान करवाया गया।
झालामण्ड़ क्षैत्र एवं कुम्हार समाज का पहला और जोधपुर जिले का दुसरा अंगदान- मानव अंग के लिए जरूरतमंद रोगियों को सालो-साल तक लम्बें इंतजार के बाद भी अंग नही मिलते हैं। अंगदान के लिए जागरूकता की कमी के कारण आगे आने वाले लोग बहुत ही कम हैं इसके कारण कई रोेगियों को समय पर मानव अंग नही मिलने पर उनकी अकाल मौत हो जाती हैं। झालामण्ड़ क्षैत्र के कुम्हार प्रजापति समाज के किसान परिवार में जन्में जोधपुर के लाल सेंवाराम के अंगदान से लोंगों को नया जीवन मिला हैं और उन लोगोेेें के परिवारों में एक नया सवेंरा हुआ हैं।
”सेंवाराम प्रजापत का इकलोता पुत्र का जोधपुर एम्स में चल रहा ईलाज” सेंवाराम प्रजापत के परिवार में श्रीमती पाकुदेवी-श्री शंकरलाल ढ़िलवाड़ी (माता-पिता) सहित श्रीमती धर्मी देवी (पत्नि) एवं एक स्वरूप-चन्द्रीका (पुत्र-पुत्री) हैं। जिसमें से उनका सबसे छोटा इकलोता पुत्र स्वरूप प्रजापत का जोधपुर एम्स में उपचाराधीन हैं।
मृत्यु के बाद भी कुछ घंटे जिंदा रहते हैं मानव अंग-जोधपुर के किडनी ट्रासप्लांट एक्सपर्ट डॉ0 ने बताया कि किडनी एवं अन्य अंगा को ट्रासप्लांट करने में दो से तीन घण्टें का समय लगता हैं। मानव अंगों को 12 घंटों तक सुरक्षित रख सकते हैं। इसके बाद वे किसी पैशेन्ट को नही लगाये जा सके हैं।
हार्ट-मृत्यु के 04 से 06 घंटे के भीतर,
किडनी-मृत्यु के 30 घंटे के भीतर,
आंत-मृत्यु के 06 घंटे के भीतर,
प्रैक्रियाज-मृत्यु के 06 घंटे के भीतर,
लीवर-मृत्यु के 08 घंटे के भीतर,